Apr 26, 2026
बरखा -बहार
ज्यों ही नभ में घटाएँ छाईं
तपती धूप से राहत आई।
अप्रैल की बूँदों की फुहार
धरती पर है लाई उपहार।
सूखी धरती माँ की गोद में
सोई हुई नयी उम्मीद जगाई।
बादल ने रिमझिम बरखा से
पौधों पर अमृत बूँदें बरसाई|
नन्हीं बूँद जब पड़ी पेड़ों पर
पत्तियाँ जी भरकर इठलाई।

लचक-लचक कर झूम-झूमकर
बरखा की बूँदों में वे खूब नहाईं।
नन्हे-नन्हे पौधे खिल-खिलकर
हमें जीवन का नया राग सुनाते ।अप्रैल के बाद जब मई है आती
फूलों की नई बहार छा जाती।
रंग-बिरंगे फूलों की छवि न्यारी
महका रहीं हर एक है क्यारी।
प्रकृति हमें यह सीख सिखाती
मेहनत कभी ना व्यर्थ है जाती।
अप्रैल की बारिश में धैर्य धरो तो
मई में अपार खुशियाँ मिल जाती।

Anju Dwivedi
Anju Dwivedi teaches Hindi in a renowned school in Ajmer. She takes pleasure in expressing her deepest thoughts, ideas and feelings through writing short stories, poems and shayari.





