Aug 25, 2026
म्हारो राजस्थान
आ धरती है म्हारै रंग-रंगीलै राजस्थान री
यह धरती है हमारे रंग रंगीले राजस्थान की
धरती है हल्दीघाटी रै सुनहरै धोरां री शान री।
धरती है हल्दीघाटी के सुनहरे धोरों की शान की।
जठै तपती,ठंडी रेत री हवा भी गीत सुणावै है,
जहाँ तपती ठंडी रेत की हवा भी गीत सुनाती है
जठै लू रा तेज थपेड़ा भी वीरां री गाथा गावै है।
जहाँ लू के तेज थपेड़े भी वीरों की गाथा गाते हैं।
अठै पृथ्वीराज,दुर्गादास,कुंभा,सांगा अर प्रताप
जहाँ पृथ्वीराज, दुर्गादास,कुंभा, सांगा और प्रताप
जेड़ा वीर अभिमानी,स्वाभिमानी मरूधर री शान है।
जैसे वीर अभिमानी, स्वाभिमानी मरुधर की शान है।
हिवड़ै मांय हूक जगावै पन्ना अर हाड़ा रानी री त्याग-कहानी
हृदय में हूक जगाती पन्ना और हाडा रानी की त्याग कहानी
अर गीतां मैं ढोला-मारू, महेंद्र मूमल रै प्रेम री अमर कहानी।
और गीतों में ढोल- मारू, महेंद्र-मूमल की अमर प्रेम कहानी।

तेजाजी, पाबूजी, गोगाजी, रामदेव जी अर पीरां री मरूभूमि,
तेजाजी, पाबूजी, गोगाजी, रामदेव जी और पीरों की मरूभूमि
तो मीरां रै इकतारे पर भक्ति सूं महकी राजस्थान री धरती।
तो मीरा के इक तारे पर भक्ति से महकी राजस्थान की धरती।
कठै ई तो बाजै चंग री थाप,तो कठै ई लंगा री कड़ताल
कहीं बजे चंग की थाप तो कहीं बजे लंगों की कड़ताल
तो कठै ई बाजै सारंगी री मीठी धुन पै गीतां रो गान।
तो कहीं बजे सारंगी की मीठी धुन पर गीतों का गान।
कालबेलियाँ री थिरकन तो कठै मुटयारयाँ घूमर करै
कालबेलियों की थिरकन तो कहीं मुटियारे घूमर करें
लोकगीतां री गूँज इण माटी रै मांय मीठो संगीत भरै।
लोकगीतों की गूँज इस माटी में मीठा संगीत भरें ।
घाघरिये रा रंग हजार, पगड़ी अठै रो है स्वाभिमान
घागरे के रंग हजार, पगड़ी यहाँ का है स्वाभिमान
कण-कण मांय इतिहास बस्यो ऐड़ो म्हारो राजस्थान।
कण-कण में इतिहास बसा ऐसा हमारा राजस्थान।
हिवड़ै रै मांय मिसरी सी घोलती मीठी अठै री बोली है
हृदय के भीतर मिश्री सी घोलती मीठी यहाँ की बोली है
राजस्थानी संस्कारां री पहचान ही मरूधर री शान है।
राजस्थानी संस्कारों की पहचान ही मरूधरा की शान है।


Anju Dwivedi
Anju Dwivedi teaches Hindi in a renowned school in Ajmer. She takes pleasure in expressing her deepest thoughts, ideas and feelings through writing short stories, poems and shayari.





